23। श्री वार्ड की बाहों में

लिली की नज़र से

गैरेट वार्ड के हाथ मेरी कमर पर कस गए और एक अधिकार-भरी बेचैनी के साथ मुझे खींचकर बिस्तर के बीचोंबीच ले आए। उसके कूल्हे मेरी जाँघों के बीच टिक गए; उसके उत्तेजित होने का सख़्त दबाव मेरे पेट से लगा तो मेरे बदन में सिहरन दौड़ गई। वह पहले से ही तनकर धड़क रहा था, और उसकी आँखों की गर्मी बता...

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